समावेशी विकास का भारतीय मॉडल
जोहान्सबर्ग में पहले सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया को याद दिलाया कि समृद्ध भविष्य की नींव समावेशिता और सतत विकास के बिना संभव नहीं। भारत की पुरातन सोच—विशेषकर समन्वित मानववाद—का उल्लेख करते हुए उन्होंने साबित किया कि आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय संतुलन एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही यात्रा के दो पहिये हैं।
प्रधानमंत्री ने चार वैश्विक पहलें प्रस्तावित कर नई दिशा देने की कोशिश की—
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ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपॉजिटरी
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जी–20–अफ्रीका स्किल्स मल्टीप्लायर
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ड्रग–टेरर नेक्सस के खिलाफ संयुक्त पहल
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जी–20 ग्लोबल हेल्थकेयर रिस्पॉन्स टीम
इनसे स्पष्ट होता है कि भारत केवल आर्थिक हितों से नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय दृष्टिकोण से भी विश्व चुनौतियों का समाधान खोज रहा है। खासकर ड्रग–टेरर नेटवर्क पर पहल वैश्विक सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में उभरी।
अमेरिकी राष्ट्रपति की अनुपस्थिति—भारत के लिए अवसर
इस बार सम्मेलन का एक दिलचस्प पहलू यह था कि अमेरिकी राष्ट्रपति उपस्थित नहीं रहे। सामान्यतः अमेरिका वैश्विक चर्चाओं का केंद्र होता है, परंतु इस स्थिति ने भारत को अपनी आवाज़ और एजेंडा को अधिक प्रभावशाली रूप से रखने का बड़ा अवसर दिया। भारत ने ग्लोबल साउथ, अफ्रीका और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अपने साथ जोड़ते हुए एक मजबूत नेतृत्व का संकेत दिया। सम्मेलन ने साबित किया कि आज भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को आकार देने वाला प्रमुख कारक बन चुका है।
मोदी–मेलोनी का ‘कैंडिड मोमेंट’ और कूटनीति का नया स्वर
शिखर सम्मेलन के दौरान एक हल्का-फुल्का लेकिन चर्चा में रहने वाला क्षण था—प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की आपसी मुस्कुराहट और गर्मजोशी। यह मुलाकात सोशल मीडिया पर ‘#Melodi’ ट्रेंड के तौर पर छा गई।
अनौपचारिक लेकिन आत्मीय मुलाकातें कूटनीति को मानवीय बनाती हैं और भारत–इटली संबंधों में बढ़ते विश्वास का संकेत देती हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक सहयोग लगातार गहरा रहा है।
भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रदर्शन
जोहान्सबर्ग में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत भारतीय सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत प्रदर्शन था। देश के 11 राज्यों की लोककलाओं के माध्यम से प्रस्तुत “Rhythms of a United India” ने दिखाया कि भारतीय प्रवासी कहीं भी रहें, वे अपनी जड़ों से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। प्रधानमंत्री ने भी इसकी अत्यधिक सराहना की।
रणनीतिक मुलाकातें और भारत का बहुआयामी एजेंडा
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने:
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दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा
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ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा
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ब्रिटेन और कनाडा के प्रधानमंत्रियों
के साथ जलवायु, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आपदा प्रबंधन, कौशल विकास और व्यापार पर उच्चस्तरीय वार्ता की।
इन मुलाकातों का उद्देश्य केवल द्विपक्षीय लाभ तक सीमित नहीं था, बल्कि वैश्विक संकटों के समाधान की दिशा में साझी पहलें बनाना था।
निष्कर्ष: भारत अब वैश्विक नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में
जोहान्सबर्ग जी–20 शिखर सम्मेलन ने यह संदेश दुनिया को स्पष्ट रूप से दे दिया कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल सहभागी नहीं, बल्कि वैश्विक एजेंडा तैयार करने वाला देश है। प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय कूटनीति, सशक्त विचारधारा और वैश्विक मुद्दों पर संतुलित लेकिन दृढ़ रुख ने भारत को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में एक केंद्रीय भूमिका दिला दी है। अफ्रीका में आयोजित यह सम्मेलन भारत–अफ्रीका–ग्लोबल साउथ के त्रिकोण को मजबूती देता है और यह दिखाता है कि भारत की विदेश नीति अब परंपरा, संस्कृति, रणनीति, सुरक्षा और विकास—सभी का संगम बन चुकी है।
