वाराणसी@उड़ान इंडिया: वाराणसी की दालमंडी सड़क चौड़ीकरण योजना एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। सरकार के 224 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत हकीम मोहम्मद जाफ़र मार्ग को 17.4 मीटर तक चौड़ा करने के लिए 187 इमारतों के अधिग्रहण और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रशासन का दावा है कि यह पूरा अभियान जनहित, यातायात सुधार और काशी विश्वनाथ मंदिर मार्ग को सुगम बनाने के लिए किया जा रहा है।

उधर व्यापारियों ने चौड़ीकरण का कड़ा विरोध जताते हुए कहा है कि बिना पूर्ण मुआवज़ा और पुनर्वास के उनकी दुकानें व मकान तोड़े जा रहे हैं, जिससे आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। विरोध के दौरान कई व्यापारियों पर मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं। हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए कई मकानों पर “स्टेटस को” आदेश जारी किया है, जिससे फिलहाल ध्वस्तीकरण रुका हुआ है।
सरकारी पक्ष में मंत्री रविंद्र जायसवाल का कहना है कि परियोजना पूरी तरह वैधानिक है और प्रभावित लोगों को सर्किल रेट से दोगुना मुआवज़ा दिया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस विकास कार्य को अनावश्यक रूप से साम्प्रदायिक रंग देकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।
वहीं विपक्ष — सपा और कांग्रेस — ने इसे प्रशासन की मनमानी बताते हुए सरकार पर छोटे व्यापारियों को उजाड़ने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता अजय राय ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर प्रोजेक्ट रोकने, पारदर्शिता लाने और उचित पुनर्वास की मांग की है। सपा नेताओं ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रावधानों का सही अनुपालन नहीं किया गया है।
दालमंडी प्रकरण फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और न्यायालयीय रोक के बीच अटका हुआ है। सड़क चौड़ीकरण को लेकर सरकार अपने फैसले पर अड़ी है, जबकि व्यापारियों और विपक्ष की मांग सुरक्षित मुआवज़ा, पुनर्वास और पूर्ण कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की है।