मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द उनके शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी अवैध गतिविधि या संदिग्ध विदेशी उपस्थिति को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हर जिले में घुसपैठियों की पहचान अनिवार्य
जारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि अपने क्षेत्र में रहने वाले संभावित अवैध विदेशी नागरिकों की सूची तैयार करें और नियमानुसार कार्रवाई तत्काल शुरू करें। इसके साथ ही सभी जिलों को ऐसे व्यक्तियों को रखने के लिए अस्थायी निरुद्ध (डिटेंशन) केंद्र स्थापित करने का आदेश दिया गया है।
डिटेंशन सेंटर में सत्यापन तक रखे जाएंगे विदेशी नागरिक
बयान में कहा गया कि इन निरुद्ध केंद्रों में ऐसे विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा जिनकी नागरिकता या कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका सत्यापन पूरा होने तक यहीं रहने की व्यवस्था की जाएगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद, संबंधित व्यक्तियों को तय प्रोटोकॉल के तहत उनके मूल देश वापस भेजा जाएगा।
खुली नेपाल सीमा और अतिरिक्त सतर्कता
उत्तर प्रदेश की नेपाल से खुली सीमा होने के कारण दोनों देशों के नागरिक बिना किसी विशेष जांच के आ-जा सकते हैं। हालांकि, अन्य देशों के लोगों के लिए अनिवार्य जाँच लागू होती है। इस स्थिति में प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
हालिया बयान से जुड़ा संदर्भ
गौरतलब है कि 3 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि यदि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सत्ता में वापस आता है, तो प्रदेश से अवैध घुसपैठियों को बाहर निकाला जाएगा और उनकी अवैध संपत्तियों को गरीबों के हित में उपयोग किया जाएगा।
