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मेरी शैक्षिक योग्यता कितनी है...?

"ये सवाल खुद चन्दौली के एआरटीओ आरएस यादव पूछ रहे हैं अपनी शैक्षिक योग्यता के बारे में, क्योंकि उन्होंने आरटीआई के जवाब में इस पर अनभिज्ञता जाहिर की है। खैर अब जब भ्रष्टतंत्र में लोकतंत्र के अमूक हथियार सूचना का अधिकार का भी मजाक बनाया जा रहा है तो एआरटीओ की शैक्षिक योग्यता ढूंढ कर लाने का दारोमदार अब आरटीआई एक्टिविस्ट पर आ गया है.......पेश है  ‘शावेज़ बन्टी’ की एक रिर्पोट-"


चन्दौली@उड़ान इंडिया :  सरकारें चाहे कितनी भी हुंकार भर लें, या फिर अधिकारी कितने ही दावे क्यों न कर लें लेकिन भ्रष्टाचार का दीमक जो सरकारी विभागों में लग चुका है वो इतनी आसानी से पीछा नहीं छोड़ने वाला। अब तो हद ही होती जा रही है, सरकारी विभागों के अफसर लोकतंत्र को भ्रष्टतंत्र बनाने पर ही तुल गए हैं। ऐसे में वो सूचना का अधिकार अधिनियम का भी मखौल बनाने से बाज नहीं आ रहे हैं। आरटीआई एक्ट 2005 में पूछे गए एक सवाल के जवाब में चन्दौली के उपसंभागीय परिवहन विभाग के अधिकारी आरएस यादव ने तो सारी हदें ही पार कर दी। जब उन्होंने इसमें अपुष्ट करते हुए यह दर्शा दिया कि उन्हें नहीं मालूम की उनकी शैक्षिक योग्यता कितनी नहीं है। ऐसे में हम ये कह सकते हैं कि एआरटीओ आरएस यादव को इस सवाल के जवाब का भी इंतेजार है कि आखिर कोई तो बता दे भाई उनकी शैक्षणिक योग्यता कितनी है....?
दरअसल, जिले का उप संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय हमेशा चर्चाओं और सुर्खियों में बना रहता है। यहां के अधिकारियों और कर्मचारियों को तो जैसे लाइम लाईट में बने रहने का हुनर आता है। कभी दलालों का चक्रव्यूह तो कभी अवैध और वसूली और कभी-कभी तो जबरन वसूली और दबंगई। ये सारे हुनर इस कार्यालय से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों में बखूबी समाया हुआ है। यहां के वर्तमान एआरटीओ भी खासे चर्चित हैं। जो घूम फिर कर दूसरे टर्म में चन्दौली में तैनात हैं। सनद रहे कि नक्सल प्रभावित जनपद से इतना लगाव रखने वाले अधिकारी कोर्ट में तलब भी हो चुके हैं। इन्हीं सब मुद्दों पर एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत जिलाधिकारी कार्यालय में नौ बिन्दुओं पर सूचना दाखिल की। सूचना मांगने के बाद इसे यहां से शायद उपसंभागीय परिवहन अधिकारी को मामला हस्तांतरित कर दिया गया। तभी तो जो जवाब मिला वो कहीं से भी गले से उतरने वाला नहीं है। आरटीआई में एक बिन्दु पर सूचना में एआरटीओ आरएस यादव की शैक्षिक योग्यता का विवरण मांगा गया था। जिस पर जवाब स्वयं एआरटीओ की ओर से ही मिला है कि ‘क्रमांक 8 द्वारा मांगी गयी सूचना जो शैक्षिक योग्यता से सम्बंधित है। उक्त सूचना स्थानीय अभिलेख में दर्ज नहीं है।’ अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि जब जवाब देने वाले यानि की प्रेषक स्वयं एआरटीओ हों तो भला उन्हें अपनी शैक्षिक योग्यता क्यों नहीं मालूम है। इसके अलावा भी कई सूचनाओं पर सीधे पल्ला झाड़ा गया है कि ये सूचनाएं अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं।
खैर जब एआरटीओ को खुद की शैक्षिक योग्यता नहीं मालूम है तो अब इसे ढूंढ कर लाने का सारा दारोमदार आरटीआई एक्टिविस्ट पर है। जिसने सूचना मिलने के बाद ही खोजबीन शुरू कर दी है और आरटीआई एक्ट के तहत प्रथम अपीलीय अधिकारी को सूचना प्रेषित कर असंतोष व्यक्त किया है। अब तो बस इंतेजार है तो जवाब आने का। ताकि एआरटीओ चन्दौली की शैक्षिक योग्यता के राज से पर्दा उठ सके और एआरटीओ साहब को भी बताया जा सके की जनाब आपकी शैक्षिक योग्यता इतनी है.......!